अर्थ जगत
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घनश्याम दास बिड़ला: हिंदुस्तान की औद्योगिक क्रांति का जनक जो खुद को व्यापारी नहीं मानता था
एक अनुमान के मुताबिक 1939 से 1969 के बीच टाटा की संपत्ति तो सिर्फ आठ गुना बढ़ी थी लेकिन, घनश्याम दास बिड़ला की संपत्ति में 94 गुना का इजाफा हुआ था
अनुराग भारद्वाज
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दुनिया का दम निकालने वाले कोरोना संकट ने धनकुबेरों के भंडार में इस कदर बढ़ोतरी कैसे कर दी?
कोरोना वायरस से उपजे संकट ने एक ओर दसियों करोड़ लोगों की नौकरी खा ली तो दूसरी तरफ मुट्ठी भर अरबपतियों की दौलत ने इस दौरान नई ऊंचाई छू ली
विकास बहुगुणा
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इस आपदा में हमारे लिए छह मोर्चों पर सुधरने का अवसर छिपा है
कॉरपोरेट के प्रति मैत्री भाव रखने वाले लोग यह तर्क देंगे कि पर्यावरण संरक्षण अमीर देशों का शगल है लेकिन इस मामले में हमें उनसे ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है
रामचंद्र गुहा
लोकप्रिय
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कम ही लोग जानते हैं कि चे गेवारा भारत आए थे और न के बराबर यह कि वे यहां क्या करने आए थे
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गांधी ने क्यों कहा था कि उपवास अहिंसा की पराकाष्ठा हो सकता है और मूर्खता की भी?
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किस्से जो बताते हैं कि आम से भी भारत खास बनता है
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कब आपको किडनी की जांच करवाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए?
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प्लेटलेट काउंट कम होने पर आपको कब और कितना डरना चाहिए?
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क्यों सरकार का यह कहना सही नहीं है कि पेट्रोल-डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार तय करता है
जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी तो पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 और 3.56 रु प्रति लीटर हुआ करती थी. आज यह आंकड़ा 32.98 और 31.83 हो चुका है
विकास बहुगुणा
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क्या सरकार का यह कहना सही है कि एमएसपी की गारंटी 17 लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष का खर्चा है
मोदी सरकार का कहना है कि उसके लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देना इसलिए संभव नहीं है क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर 17 लाख करोड़ रुपयों का बोझ पड़ेगा
सत्याग्रह ब्यूरो
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‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ से भारत में क्या बड़ा बदलाव आने वाला है?
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) स्वतंत्र भारत में रेलवे से जुड़ी सबसे बड़ी परियोजना है
सत्याग्रह ब्यूरो
क्विज
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क्विज़: आप इरफान खान के कितने बड़े फैन हैं?
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क्विज: क्या आप एसपी बालासुब्रमण्यम को चाहने वालों में से एक हैं?
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क्विज़: अदालत की अवमानना के तहत आप पर कब कार्रवाई हो सकती है?
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इस साल हज यात्रा पर रोक लगााए जाने के अलावा आप इसके बारे में क्या जानते हैं?
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क्विज: भारत-चीन सीमा विवाद के बारे में आप कितना जानते हैं?
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डिजिटल भारत में क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करना इतना मुश्किल क्यों है?
डिजिटल इंडिया सबसे पहले कैश लेता है, फिर गूगल पे जैसे साधनों की ओर देखता है और इन दोनों की अनुपस्थिति में ही क्रेडिट कार्ड के बारे में सोचता है
अंजलि मिश्रा
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हर साल विदेशियों को हजारों करोड़ रु का चूना लगाने वाले फर्जी कॉल सेंटर भारत में कैसे चलते हैं
इनके चलते विकसित देशों में भारत की एक पहचान फर्जी कॉल सेंटर्स की राजधानी के तौर पर भी होने लगी है
विकास बहुगुणा
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क्यों देश के सबसे बड़े उद्योगपति जेआरडी टाटा से ज्यादातर प्रधानमंत्रियों ने दूरी बनाकर रखी
इस बात का जेआरडी टाटा को अफ़सोस भी रहा. लेकिन इस अफ़सोस की वजह किसी निजी फायदे से नहीं जुड़ती थी
अनुराग भारद्वाज
समाज और संस्कृति
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किस्से जो बताते हैं कि आम से भी भारत खास बनता है
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क्यों तरुण तेजपाल को सज़ा होना उनके साथ अन्याय होता, दूसरे पक्ष के साथ न्याय नहीं
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कार्ल मार्क्स : जिनके सबसे बड़े अनुयायियों ने उनके स्वप्न को एक गैर मामूली यातना में बदल दिया
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जो लेखक अपने संघर्षों को बहुत गाते हैं वे उन संघर्षों की अवमानना करते हैं
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वन अरेंज्ड मर्डर: ‘जब प्यार में आप किसी को गुझिया बुलाने लगें तो ज़रा रुककर सोचना चाहिए’
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नोटबंदी के समर्थन में कई जिनकी किताब का हवाला देते हैं वे खुद इसे लेकर क्या सोचते हैं?
आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके और इन दिनों हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केन रोगॉफ ने नोटबंदी के बाद अपनी किताब कर्स ऑफ कैश में कुछ अंश जोड़े हैं
सत्याग्रह ब्यूरो
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जिस टेलिकॉम ने मुकेश अंबानी को नई बुलंदियां दी हैं उसी ने अनिल अंबानी को सड़क पर कैसे ला दिया?
मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो में लॉकडाउन के दौरान डेढ़ लाख करोड़ रु से ज्यादा का निवेश हुआ है. उधर, अनिल अंबानी के लिए इस दौरान घर के गहने बेचने की नौबत आ गई
विकास बहुगुणा
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नये श्रम कानूनों का मक़सद अगर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग को ही सुधारना है तो ये कमाल के हैं
नये श्रम कानूनों ने कामगारों की कुछ लोकप्रिय मांगें पूरी की हैं पर यह आरोप भी लग रहा है कि इन्होंने उनके सबसे जरूरी अधिकार छीनकर कंपनियों को दे दिये हैं
अभय शर्मा
विशेष रिपोर्ट
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सर्दी हो या गर्मी, उत्तर प्रदेश में किसानों की एक बड़ी संख्या अब खेतों में ही रात बिताती है
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कैसे किसान आंदोलन इसमें शामिल महिलाओं को जीवन के सबसे जरूरी पाठ भी पढ़ा रहा है
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हमारे पास एक ही रेगिस्तान है, हम उसे सहेज लें या बर्बाद कर दें
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क्या आढ़तिये उतने ही बड़े खलनायक हैं जितना उन्हें बताया जा रहा है?
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक गांव जो पानी और सांप्रदायिकता जैसी मुश्किलों का हल सुझाता है